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| Ashok Bahirwani's Updates 20-06-2012 |
Ashok Bahirwani’s update: 20th June, 2012
Good Evening Friends,
EOW ने मुम्बई हाई कोर्ट में जो आपराधिक आवेदन ३००/२०१२, दर्ज किया था, माननीय मंडल पीठ द्वारा, २१ मार्च २०१२ को दिए गए रोक आदेश को रद्द करने के लिए, वो सोमवार १८ जून २०१२ को सुना जाने वाला था.
मामले के बुलाये जाने पर, हमारे वकील ने माननीय न्यायालय को सूचित किया कि मुख्य याचिका २८ जून २०१२ को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है और माननीय अदालत ने इस मामले को २८ जून २०१२ पर स्थगित कर दिया, लेकिन अंत में सब की सुविधा के अनुसार तारीखें समायोजित करने के बाद अब मामला ३ जुलाई २०१२, के लिए तैनात किया गया है.
ध्यान देंना महत्वपूर्ण है कि माननीय मंडल बेंच ने सूझ भुज से आवेदन में कोई आदेश पारित करने से परहेज किया है.
१३ जून २०१२ को , जब आवेदन पहली बार सुना जा रहा था, माननीय न्यायालय ने हमारे वकील और अतिरिक्त सरकारी वकील (APP) की प्रस्तुतियाँ पर बिना कोई आदेश पारित किये, सिर्फ ध्यान दिया था.
कल एक बार फिर अतिरिक्त सरकारी वकील ने चीखते हुए अपनी विचार प्रक्रिया शुरू की और खुली अदालत में उल्लेख किया, कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जांच जारी रखने की अनुमति दी है, जिसपर एक बार फिर माननीय न्यायालय ने इस प्रकार की टिपण्णी दी:-
" इस अदालत ने इस आपराधिक आवेदन पर कोई आदेश पारित नहीं किया है और केवल अतिरिक्त सरकारी वकील का बयान दर्ज किया है."
यह अलग बात है कि हमारे प्रिय मित्र, न्यायमूर्ति श्री मतीन हफीज़ ने , माननीय न्यायालय की प्रक्रिया को अवमानित करने की कोशिश में, १६ वीं जून २०१२ के टाइम्स ऑफ इंडिया के पृष्ठ ४ पर प्रदर्शित, अपने रिपोर्ट द्वारा, १३ जून २०१२ को माननीय न्यायालय के कोर्ट. घटनाओं का गलत रिपोर्टिंग किया था.
निष्ठाहीन मतिभ्रमित इस व्यक्ति के संन्देह्पूर्ण रिपोर्ट में उसने तिरस्कारपूर्ण तरीके से आम जनता को गलत सूचित किया है कि माननीय हाई कोर्ट ने EOW को जांच जारी रखने के लिए अनुमति दी है.
हम सभी जानते हैं कि मतीन, मतिभ्रम स्तिथि में रहते है और दुखभरी ज़िन्दगी गुजारते हैं, असफलता के मकड़ी के जाल से लढते हुए.
यह आदमी बीमार है और मदद की उसे तुरंत जरूरत है. कोई भी सामान्य व्यक्ति अंधा होकर, तथ्यों को अनदेखा कर, माननीय हाई कोर्ट और Speakasia मामले के साथ जुड़े लाखों लोगों की भावनाओं का अनादर कैसे कर सकता है?
अद्यतन के अंत में मैंने उसके संन्देह्पूर्ण लेख का एक खुले पत्र द्वारा निपटारा किया है.
AISPA ने कोर्ट की स्वप्रेरणा अवमानना के लिए एक आपराधिक आवेदन दाखिल किया है, मतीन हाफिज और कुछ अन्य व्यक्तियों के खिलाफ, जिन्होंने उसे टाइम्स ऑफ इंडिया, दिनांक १६ जून २०१२, पृष्ट ४ पर प्रदर्शित बिल्कुल गलत रिपोर्ट के प्रकाशन में सहायता की है.
एक आपराधिक आवेदन क्रमांक APPW/३२२/२०१२, १९ जून २०१२ को दायर किया गया था. इसका, माननीय न्यायालय के समक्ष आज उल्लेख किया गया था, इस के संचलन की अनुमति दी गई है और मामला अब सोमवार, २५ जून २०१२, को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है.
मामले की पृष्ठभूमि इस प्रकार है:
१० मई २०१२ को माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा किया गया अवलोकन, नीचे इस प्रकार है:
"हम स्पष्ट करते हैं, मध्यस्थ या इस न्यायालय के समक्ष इस मामले के लम्बित होने से, जांच पर रूकावट नहीं पैदा .होगी."
मेरे विचार से. ऊपर किया गया अवलोकन स्थापित कानूनी प्रणाली में सामान्य है.
ऊपर किया गया अवलोकन निम्न कारणों की वजह से २१ मार्च २०१२ को WP / ३६११/२०११ में मुंबई हाई कोर्ट द्वारा दिए गए स्थगन की दिशा में किसी भी तरह से संबोधित नहीं करता है:
अ) माननीय सुप्रीम कोर्ट का अवलोकन किया गया था, WP / ३६११/२०११ की पृष्ठभूमि जाने बिना, क्योंकि जब १० मई २०१२ को मामला सुना गया था , WP/३६११ /२०११ , चर्चा के लिए सूचीबद्ध नहीं था.
ब) माननीय सुप्रीम कोर्ट को इस तथ्य के बारे में पता नहीं है, कि माननीय मुंबई हाई कोर्ट ने इस मामले में जांच पर रोक लगायी है.
क) माननीय सुप्रीम कोर्ट को इस तथ्य के बारे में सूचित नहीं किया गया है कि मूल शिकायतकर्ता श्री नवनीत खोसला को उसकी पूरी देय राशि संतुष्टि से प्राप्त हुई है , और उसने व्यक्तिगत तौर पर एक शपथ पत्र द्वारा और खुद की उपस्थिथि से, अदालत को, १५ मार्च २०१२ को . इसके बारे में सूचित किया है.
ड) माननीय सुप्रीम कोर्ट का अवलोकन, माननीय हाई कोर्ट का कानून के अनुसार अपनी योग्यता के आधार पर किसी भी मामले का न्यायिक निर्णय करने की क्षमता को नाकाम नहीं करता है.
जैसा कि ऊपर दर्शाया गया है बहुतायत स्पष्ट है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा की गयी टिपण्णी सामान्य हैं और केवल कानून के अनुसार स्थापित कानूनी दृष्टिकोण बताते हैं. अवलोकन का कोई सम्बन्ध नहीं है माननीय हाई कोर्ट द्वारा दी गई रोक पर , अगर रोक आदेश को रद्द करना है, यह सिर्फ माननीय हाई कोर्ट द्वारा किया जा सकता है, जब तक रोक पर एक उपरी अदालत के समक्ष आपति नहीं उठाई जाती है , जो अब इस समय तक नहीं उठाई गयी है.
यहाँ पर उल्लेख करना उचित होगा सभी सम्बंधित के नज़र में लाना कि अब तक परिचालन आदेश जो लागू है वो आदेश दिनांक ३ अप्रैल का, जिसके अनुसार, "अंतरिम आदेश अगले आदेश तक जारी रहेगा."
.हेनरी ए वालेस, का एक प्रसिद्ध उद्धरण हमारे अज्ञात दुश्मन के लिए, मेरे दिमाग में आता है और हम Speakasians को भी सही लगता है:
"उनका अंतिम उद्देश्य, जिसकी ओर उनका सभी छल कपट निर्देशित है, वो है सत्ता पर कब्जा करना , ताकि राज्य की सत्ता और बाजार की सत्ता का एक साथ उपयोग करते हुए, वे आम आदमी को अनन्त पराधीनता में रख सकें."
धैर्य रखिये , विश्वास रखिये , अपनी कंपनी पर भरोसा रखिये .
मोरया .... भाई मोरया
जय Speakasia
जय Speakasia
जय Speakasia.
अशोक बहिरवानी
सचिव
AISPA
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